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सिगरेट एक जहर – रवि कान्त अगृवाल

दोस्तों आज सुनाता हुं मै आपको आपबीती
जो शायद हर सिगरेट पीने वाले पर बीती

सिगरेट हैं एक ऐसा जहर
जो धीरे धारे दिखाता है अपना कहर

जितना रहेंगें इससे दूर
बना रहेगा चेहरे का नूर

ये अपनी खुशियों को जीवन से हटा देता हैं
और उमृ के पलो को घटा देता हैं

अाओं इसका बहिष्कार करें
अपने जीवन का उद्धार करें ।।।।

रवि कान्त अगृवाल

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

2 thoughts on “सिगरेट एक जहर – रवि कान्त अगृवाल”

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