दान-मुकेश नेगी

दान-मुकेश नेगी

पवित्र जिसकी कामना उसका अतुल्य मोल है

अर्पण हुए जो प्रेम से वह दान भी अनमोल है।

चित्त हर्ष से दिए दान से स्वच्छंद हो ये आत्मा  बड़भाग उसके हैं

बहुत जिसको मिला परमात्मा । इच्छाए

पनपे मन मे जो दिए दान का जो

फिर मिलेगा फल कहाँ व्यर्थ ही सब काम हो ।

दान वही साकार है जिसमे अहम का नाश हो

छल-कपट न हो कहीं चित्त प्रेम का ही दास हो ।

 

           

            मुकेश नेगी

       देहरादून, उत्तराखंड

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