” दादी माँ “-सचिन ओम गुप्ता

” दादी माँ “-सचिन ओम गुप्ता

sachin om guptaआओ तुम्हें मैं एक बात बताऊं,
एकदम सच्ची, पूरी पक्की
दादी माँ होती है ,
घर की नींव एकदम पक्की |

कमर झुका कर थी वो चलती,
धीमी सी थी उसकी चाल
दुबला-पतला शरीर था उसका ,
थे सर पे चमकते सफ़ेद बाल |

जब भी मैं परदेश से घर को आता,
उसके पास जाकर था मैं बैठता
कुछ उनसे अपनी मै कहता,
कुछ उनकी था मैं सुनता |

अपने मन में यह सोच रहा,
खूब बड़ा बन जाऊ मैं
दादी की सेवा करके ,
जीवन को सफल बनाऊ मैं |

माना की उसकी उम्र थी पकी ,
लेकिन मेरी दादी नहीं थी थकी |

जीवन में तुम हमेशा अपनी दादी की सेवा करना,
फिर अपनी जेबें तुम उनकी दुआओं से भरना |

कमर झुका कर थी वो चलती,
धीमी सी थी उसकी चाल
दुबला-पतला शरीर था उसका ,
थे सर पे चमकते सफ़ेद बाल |

धन्यवाद…

sachin om guptaसचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम
उत्तर प्रदेश

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