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दाम – माधव मुळे

शेतकरी बाप माझा
रात्रनं दिस करी काम
तरी त्याच्या कामाला
सरकार देईना योग्य दाम

या दामा पाई कर्ज डोई
होऊनिया बसलं
अन त्यात मध्ये साल
बघा आलं हे असलं

पावसाच्या अवेळी पडन्याने
रब्बी सारी झाली बघा नष्ट
अन काही फायदा झाला
नाही करून बापानं कष्ट

थोडं पीक येत हाती
त्यालातरी हमी भाव द्याव
या सरकारनं तरी
त्यांच्या भावना समजून घ्यावं

माधव मुळे

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

3 thoughts on “दाम – माधव मुळे”

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