देर ना लागै-दीप जांगड़ा

देर ना लागै-दीप जांगड़ा

बेशक हो बोल बाला जग मैं राख़ होते देर ना लागै
अपणा अपणा दिखे जा सै साख़ खोते देर ना लागै
भजन करे तै राम मिलै ना माँ बाप के चरण पकड़ ले
दान करे तै धन होवै एक तै लाख होते देर ना लागै

संस्कारां मैं बंधै जो आत्मा पाक होते देर ना लागै
हँकारी की मोह माया भी खाक होते देर ना लागै
फूंक लिकड़ जया माणस की दो घड़ी मै माटी होज्या
अर साचे स्याणे घर बारी का साक होते देर ना लागै

यार बणाई हाँडै ग़म के खिलाफ होते देर ना लागै
राजनीति उबले जा सै फेर भांफ़ होते देर ना लागै
स्याणे कह कै जा लिए आडै कोई भी टिक ना पावै
राजे महाराजे नै भी कोयला कांक होते देर ना लागै

हिम्मतां का गोस्सा शीलगा ले आंच होते देर ना लागै
राख भरोषा हर पै दुश्मन कै आंख होते देर ना लागै
रै जै ना रडक्या दो च्यार आँख्यां मैं ओ भी के जीणा
दीप घुमान का बोलले सूपड़ा साफ होते देर ना लागै

इश्कां तै बच ले मंदे माड़े हालात होते देर ना लागै
रांझे मजनूं जा लिए माटी गात होते देर ना लागै
इश्क़ तो सुण धरती का ऐ बफा दिया करै जांगड़ा
सुखी साँझी जिंदगी बारां बाट होते देर ना लागै

बेशक हो बोल बाला जग मैं राख़ होते देर ना लागै
अपणा अपणा दिखे जा सै साख़ खोते देर ना लागै

 

   दीप जांगड़ा               

 

Deep Jangra

मैं दीप जांगरा कैथल हरियाणा का निवासी हुँ। मैं वीर रस का कवि हूँ।

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