देश के नेता-अशोक कुमार

देश के नेता-अशोक कुमार

चर्चा है ये राज विषय का
राजनीति हुई पुरानी
आज के नेता बना रहे है
मिलकर इसको नई कहानी
घर घर जाकर वोट मांगते
फ़्री में देंगे बिजली पानी।

राजनीति खेल बनाते
सब लोगो की रेल बनाते।

बाटते सबको दारू पैसा
साथ चाय के गरम समोसा
बदले में फिर वही करोगे
में कहूंगा तुमसे जैसा।

कोई किसी की करे बुराई
कोई किसी की करे बड़ाई
कुर्सी के लालच के कारण
आपस मे सब करे लडाई।

जैसे जैसे रैली बढ़ती
नारे बाजी पब्लिक करती
काम काज सब छोड़के अपना
रैली में हो जाते भर्ती।

सारे मिलकर शोर मचाते
गली गली के चक्कर खाते
नेता लेकर चलते गाड़ी
सब जनता को मूर्ख बनाते।

आखिर जब कोई जीत जाता
हर कोई उसका गीत गाता
जब जाता कोई मदद मांगने
नेता उसको आंख दिखाता।

पब्लिक का फिर रोना होता
जब उनका कोई काम न होता।

नेता से ये आकर कहता

हमने क्या कुछ गलत किया था
वोट कीमती तुम्हे दिया था
मेरा राशन कार्ड बना दो
मुझको कुछ सुविधा पहुँचा दो।

दूंगा तुमको वोट अबना
न काम हुआ गर मेरा वर्ना

नेता…

तूने क्या एहसान किया था
मैन तेरा कर्ज लिया था
जीता हूँ मेहनत से अपनी
सफल हुआ जब मेरा सपना
अकड़ दिखा मत मुझको अपनी
वोट कीमती लेजा अपना।

नेताओं का हाल बुरा है
इलेक्शन का साल बुरा है
न किसी के हित मे जाओ
न किसी पर मोहर लगाओ
घर बैठो आराम से अपने
खाओ पीओ और मौज उड़ाओ

या तो नोटा दबाओ।

 

    अशोक कुमार

 बिहार, कादीपुर, दिल्ली

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