ढोनेवाला-आशीष

ढोनेवाला-आशीष

कितना है बल तुझमे?
इस इतिहास को बदलने का
क्यों-क्यों करता हैं प्रयास
सब तेरे लिए है व्यर्थ
क्यों पाने कि है चाह तुझे
जो तेरा था न कभी
देता है शत् – प्रतिशत
मिलता है क्या? इस नश्वर संसार से
उठ-उठ,झुक-झुक,गिर-गिर
तेरी है क्रियाएँ समस्त
फिर भी पाटने क्षितीज को
हैं तुझमें बाहुबल कितना और कैसे?

 

       आशीष

परगना, पश्चिम बंगाल

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