दिल के टुकड़े-चेतन वर्मा

दिल के टुकड़े-चेतन वर्मा

इस कदर खो गए
दिल के टुकड़े मेरे…💔
एक को समेटने से पहले
दूसरा रूठ जाता है
कोई इधर गिरता है
तो कोई गिर ही नहीं पाता है
बहते हुए आंसुओं को
संभालना मुश्किल हो जाता है
इस कदर हो गए
दिल के टुकड़े मेरे…💔
जिसको समझा बहुत
समझ आया नहीं
समझा कर चला जाता है
दो कदम साथ चलकर
यू बल खा जाता है
लाख सपने सजाए
महफ़िल में रंग लाने को
यहां तो तूफानों से
गरीबों के घर उजड़ जाते हैं
इस कदर हो गए
दिल के टुकड़े मेरे…💔

 

Chetan Vermaचेतन वर्मा
बूंदी, राजस्थान

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