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दिल की दो टूक बातें – सोनी कुमारी

कैसे कहूं इस दिल की दो टूक बातें,
शायद बयां न हो पाएं लफ़्ज़ों से,
जब हम – तुम थे इस जमाने में,
कोई फिकर ना थी,
थे हम दीवाने से,
बेजुबान लब थे,
होंठ थे सिले – सिले ,
जुबां खामोश रहीं और कह ना सकी मै अपने दिल की दो टूक बात,
जब कोशिशें हुई एक होने की तो,
दूर रहा इस कदर मुझसे तू
जैसें आसमां हो नाराज जमी से,
कैसे छुपाऊ जहां से तेरे प्रति प्यार,
एक वो जो कह ना सके,
एक वो जो कहते हुए हार गए,
तू साथ नहीं मेरे,
तेरी यादें जिंदा हैं,
ऐसे क्यों रूठे प्रिय तुम
कि वर्षों बाद भी ना दिखाई दिए,
जहां भी जाए ये तन,
मन लगे तेरी यादों में,
नजर ढूंढ़ती रहती हैं तुझे ईधर – उधर,
ना समझ पाऊ इस दिल को,
ढूंढ भी पाऊं तुझे कैसे
ना बची अब तेरी कुछ निशानी,
कैसे कहूं मैं इस दिल की दो टूक कहानी,
छोड़ गया तू मुझे इस कदर राह में,
कि सदियों बाद भी तुम नहीं दिखे,
किस खता की दिया तुमने ये सजा,
अब ना तेरी रही मैं,
मेरे हांथो में किसी और का मेहंदी सजा,
मैं बन के भी उनकी,
फिर भी दिल तो तेरे पास रहा,
बार – बार तेरी यादें खामोश कर बैठती है,
आज भी ये दिल तुझे एक बार देखने को करता है,
मैं ना कह पाऊं तुझसे,
अपने इस दिल की दो टूक बातें!!

Sony Kumariसोनी कुमारी
पूर्णिया बिहार

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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