Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

दिल को छू गई

हवा की ये मतवाली चाल
फूलोँ की झूमती डाल
रंग-बिरगेँ किटोँ का जाल
इसको कष्ट ना पहुँचाना रे मानव !
छु गई है दिलको मरे आया बसंत बनकर ये कैसा मेहमान

खेलती है संग मेरे ये खेल
ग्रीष्म मे जला दिया, शीत मे जमा दिया
रुठ गए हमतो, बसंत मनाने चला आया
उदासी भरे जीवन को फिर से महका दिया
रँग-बिरगेँ फूलो ने सबको मोहजाल मे फसा लिया

चली आई सरसोँ हाथ पीले करके
सबके दिलो को दिवाना बना दिया
आया यादोँ का मेला, बुढ़ापे मे भी जवानी ला गया
ऐसा आया बसंत मेरे दिल को भा गया

होली की ये रंगोली पिचाकारी का पानी
खट्टी मिट्टी यादेँ लेकार बसंत सबको दिवाना बना गया
हरी-भरी कनकेँ, तोबा ये झूमती डाल
देख-देख इसको हमको हमतो पागल हो गए पागल

घोड़ेला अब तुमको क्या-क्या बताए यार
रोते को हँसा दिया, बिछड़े को मिला दिया
आया यादोँ का मेला, बुढ़ापे मे भी जवानी ला गया
ऐसा आया बसंत मेरे दिल को भा गया॥

  • आशीष घोड़ेला
81 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype
Ashish Ghorela

Ashish Ghorela

उभरते हुए रचनाकारों और लेखकों को एक समृद्ध मंच प्रदान करने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 26 जनवरी 2017 को साहित्य लाइव की शुरवात की। जिससे उभरते हुए रचनाकारों का सम्पूर्ण विकास हो सके तथा हिंदी भाषा का प्रचार और विकास में वृद्धि हो सके। वैसे मैं हिसार (हरियाणा) का निवासी हूँ और दिशा-लाइव ग्रुप का संस्थापक हूँ।

Leave a Reply

संविधान निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानेवाले छग के माटीपुत्र-वीरेंद्र देवांगना

संविधान निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानेवाले छग के माटीपुत्र:: ब्रिटिश सरकार के आधिपत्य से स्वतंत्र होने के बाद संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य भारत के लिए

Read More »

ताज होटल में जयदेव बघेल की कलाकृति अक्षुण्य-वीरेंद्र देवांगना

ताज होटल में जयदेव बघेल की कलाकृति अक्षुण्य:: 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल में हुए आतंकी हमले में वहां की चीजें सभी

Read More »

Join Us on WhatsApp