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दिवाने ख़ास आए है! – राजपुत कमलेश “कमल”

दिवाने ख़ास आए है! 💞
मैकजे खोल दे साकी,
दिवाने ख़ास आए है!
तेरी आँखों से जो छलके,
वो पीने जाम आए है!!
तमन्ना रह गयी आधी,
अधुरे ख्वाब आए है!
जो जलकर जल नही पाये,
वही चराग आए है!!
मैकजे खोल दे साकी,
दिवाने ख़ास आए है!
कभी पुरा नही है जो,
वो टुटा ख्वाब आए है!
गमे नस्तर की दुनिया से,
जख्मे ख़ास आए है!!
मैकजे खोल दे साकी,
दिवाने ख़ास आए है!
जो रहबर साथ चलते थे,
उन्हें अब छोड़ आए है!
सफीना उन्की यादो का,
डुबो कर आज आए है!!
मैकजे खोल दे साकी,
दिवाने ख़ास आए है!
महेफिले छोड़ दुनिया की,
गमे सैलाब आए है!
मोहब्बत से हुए रुस्वा तो,
तेरे पास आए है!!
मैकजे खोल दे साकी,
दिवाने ख़ास आए है!

Kamlesh Rajput(Kamal)राजपुत कमलेश “कमल”
अहमदाबाद (गुजरात)

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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