दो रचना-विसंभर व्यग्र

दो रचना-विसंभर व्यग्र

सावन तेरा स्वागत करते हैं सभी प्राणी
मेंढ़क टर्रा -टर्रा करते हैं, तेरी अगवानी
पीऊं पीऊं पुकारे तुमको, ये कोयल रानी
विरदावली सुनाते झींगर, टेर खूब तानी
हरी भरी सज जाती धरती, सर पानी पानी
तू भगवान किसान का तेरा नहीं कोई सानी
दीप-धूप से पूजन करते, मेघ तड़ित रानी
दिन को करदे रात तू ने जब-जब भी ठानी
अंजुरी भर भर प्यार लुटाता, तू महादानी
जो अगर रूठ जाये हमसे, याद आये नानी

सखी री सावन आया
छत की मुंडेर चँढ़ मयूरा ऊंचे स्वर में गाया
उमड़- घुमड़ कर मेघा आये पानी बरसाया
पीव पीव पपीहरा बोले और मेंढ़क टर्राया
भर गये सूखे खेत तड़ाग का रूप बनाया
आने की कह गया कृष्ण बापस ना आया
मेघा संग देख बिजुरिया मेरा मन घबराया
पुरवा तीखे तीर चलावे सखी सावन आयाव्यग्र पाण्डे

 

  vishwambhar vyagra 

 विसंभर व्यग्र पाण्डे

गंगापुर ,राजस्थान

Vishwambhar Vyagra

मैं विश्वम्बर व्यग्र गंगापुर राजस्थान का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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