Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

दुल्हन की उलझन-ऍम के निर्माण

 वो  नन्हे पैरो से बाबुल जब तेरे आंगन मे खेली
 वो जब तेरी गोदी के पालने मे झूली बाबुल
 वो तेरा आंचल माई जिसने सुलाया मुझको
वो तेरी लोरी की धुन कानो मे खनकती है मेरे
वो तेरे कांधे पे सिर रखके सो जाती थी जब मै
अब याद मुझे वो बचपन आता है

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp