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दुनिया दुख भंडार-मुफ्त शिक्षा-पी के

दुनिया है दुख का भंडार
यहां न किसी को सुख भरमार
यहां होता है अत्याचार
सब पर है पापों का भार
कहो कैसा यह संसार
सुख के पीछे दुख लगा है
सुख है वह भी झूठा
यह देख कर के लेखक
दुनिया है रूठा
दुनिया में फैला हाहाकार
कहो कैसा यह संसार
कोई दुखी माया से
कोई दुखी काया से
कोई ग्रह दाह से
यहां तो है भंगार
कहो कैसा यह संसार
कोई दुखी तन से
कोई दुखी मन से
कोई दूजे के सुख से
चारों तरफ दुख की भरमार
कहो कैसा यह संसार
हर घर में फैला मातम
देख दुखी होती आतम
चारों तरफ है भ्रष्टाचार
बने अनेक हैं लाचार
कहो कैसा यह संसार
दुनिया में आकर के लोग
दुनिया से करते व्यापार
समझ ना आता इस का सार
रह जाते हैं हाथ पसार
कहो कैसा यह संसार
जीवन आशाओं से भरा
जो उतरता है खरा
या नहीं है चैन की नींद
कैसे सोए पांव पसार
कहो कैसा यह संसार

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