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दूरियां-दीप्ति-यादव

दुर तो हो गई हु तुमसे
पर फिर भी तुमसे दुर नहीँ

दो जिस्मों के बीच फासला तो कर लिया
पर दिलों में अब भी बाकी हैं

खड़े है दोनों दो किनारों पर
और बीच में है अथाह नीर
फिर भी दूर नहीँ तुमसे

रूह है जिस्म में जैसे उसी तरह
मुझमे हो तुम

कोशिशे तो बहुत की तुम्हे भुलाने की
पर नाकामयाब रही मैं

ये मोहब्बत दो जिस्मो का नहीँ
जो टूट जाये कुछ दुरियों से

रोकेगा ये जमाना मुझे तुमसे मिलने से
पर मेरी रूह को कैसे रोकेगा

ये मोहब्बत तो रूह का हैं
जिस पर दूरियों का असर नहीं होता |

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