ऐ खुदा, हो मेहरबाँ

ऐ खुदा, हो मेहरबाँ

दुनिया के रखवाले जिससे सभी को डर,

आया एक सवाली तेरे दर पर;

करूँ न कभी कोई दूसरी रज़ा,

ऐ खुदा,हो मेहरबाँ।

 

रहमत तेरी सभी को मिले,

नफरत-भरे इस जहाँ में मोहब्बत-ए-फूल खिलें;

करूँ न कभी कोई दूसरी रज़ा,

ऐ खुदा,हो मेहरबाँ।

 

मेरी गुस्ताखियों को तू करना मुआफ,

तेरे दीदार को तड़प रही मेरी आँख;

करूँ न कभी कोई दूसरी रज़ा,

ऐ खुदा,हो मेहरबाँ।

 

ऐ ऊपरवाले,तेरे बंदों को एक पैगाम दे,

बैर न रहे किसी का किसी से;

करूँ न कभी कोई दूसरी रज़ा,

ऐ खुदा,हो मेहरबाँ।

 

राह-ए-जिंदगी में बनना हमदर्द,

कर दे परे दुनिया से ख्वाहिस-ए-खुदगर्ज़;

करूँ न कभी कोई दूसरी रज़ा,

ऐ खुदा,हो मेहरबाँ।

–    सचिन अ॰ पाण्डेय 

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account