एहसास – चन्दन कुमार

एहसास – चन्दन कुमार

ओ मेरे दिल में बसी एक अनजान एहसास
जिसे जानता नहीं मैं ऐसा लगता हैं दिलको
जैसे ओ रहती हैं हमेशा ही मेरे आस-पास
कभी-कभी होता हैं बिलकुल ऐसा एहसास
जैसे पीछे से आई एक मीठी-सी आवाज
कभी-कभी दिल को तसब्बुर में समझाता हूँ
कुछ नहीं हैं हकीकत सबकुछ हैं बकवास
फिर खुद ही एकाएक सोचने लगता हूँ
आखिर कुछ ना कुछ तो जरुर हैं खास
वरना क्यों होता मुझको भला ये एहसास
जैसे कोई हमेशा रहती हैं मेरे आस-पास
अजब सी ख़ुशी महसूस होता हैं सोचकर ये बात
आखिर कोई ना कोई तो रहता हैं मेरे साथ
हमेशा महसूस करता हूँ आँखे अपनी मूंदकर
एकाएक आँखे अपनी खुल जाती हैं वही आवाज सुनकर
चलते-चलते अचानक पीछे देखता हूँ मुड़कर
देखता रहता हूँ बेचैन होकर जहाँ तक जाती हैं नजर
फिर दिल एकदम से हो जाता हैं बहुत उदास
देखकर ये की कोई नहीं हैं मेरे आस-पास
ओ मेरे दिल में बसी एक अनजान एहसास
जिसे जानता नहीं मैं ऐसा लगता हैं दिलको
जैसे ओ रहती हैं हमेशा ही मेरे आस-पास
दिल को मैंने अकेले में बहुत समझाया
ऐसा कोई नहीं तेरा जिसने तुझको अपनाया
जग में कोई नहीं हैं पगला तेरा अपना खास
फिर भला तू क्यों करता हैं ऐसा एहसास
भूल जा तू सबकुछ कुछ नहीं हैं सब हैं बकवास
दिन रात फिर सोचने लगा पागल होकर मेरा मन
जनता नहीं क्यों दिल में लगी हैं ऐसी लगन
ऐसे ही एक दिन बैठा था बहुत खामोस
बैठे-बैठे दिल को खुद ही रहा था जी भरके कोस
फिर अचानक सामने से गुजरी सुमन
जैसे दिल में बड गई एकाएक और भी जलन
जब ओ आई मेरे पास ख़त्म हो गई एहसास
दोस्तों आज ओ नहीं हैं बिलकुल मेरे पास
और मैं बन गया हूँ जीता जगता लाश
दिल में फिर जगी है एकबार फिर वही एहसास
जग में रह गया हूँ अकेला कोई नहीं मेरे पास
मेरा अधुरा ही रह गया प्यार का एहसास
आजतक जिन्दा हैं दिल में प्यारा-सा एहसास
छोड़ गई मुझे ओ हमेश के लिए जग में अकेला
अब कभी-कभी नहीं आयेगी ओ मेरे पास
जबतक इस शारीर को छोड़ ना दे मेरा साँस

चन्दन कुमार
मोहाली (पंजाब)

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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