एक खाली पहलू – पूजा चौहान

एक खाली पहलू – पूजा चौहान

खाली है आगाज़ जिसका
खाली है अंजाम जिसका
वह है एक खाली पहलू जिंदगी का

ना रंग लगा है इसमें
ना संग चढ़ा है इसमें

ना दिन में तारे देखे हैं
ना रात में बहारे ही देखी है

ना फूलों सा गुमान किया
ना कलियों सी मुस्कान पाई

ना इंतजार ने इजहार किया
ना सदियों से इख्तियार किया

खाली है आगाज़ जिसका
खाली है अंजाम जिसका
वह है एक खाली पहलू यादों का

किताबों पर नहीं बिखरे सूखे हुए फूल
पन्नों पर नहीं करते ,धुंधले हुए लफ़्ज़ों को कुबूल

किस्सों में नहीं होते खोते हुए पल
बातों में नहीं सिमटे रोते हुए कल

गुजरे हुए वक्त से नहीं भीगा करती पलकें
सोए हुए लम्हों से नहीं जागे ,आंखें मलके

नहीं जला करते दीए बंद निगाहो के ,ख्वाबों से
सिर्फ बना करते हैं खाली पहलू यादों के।

पूजा चौहान

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