एक लंबा सफर – शुभम् लांबा

एक लंबा सफर – शुभम् लांबा

बेखबर, एक सफर में चला जा रहा था में,
तेरी यादों का कारवां साथ लिए चला जा रहा था में।
कुछ सुझ नहीं रहा था ,सिर्फ महसूस हो रही थी तेरी कमी,
शायद इसलिए मन बैचेन था, और आंखों में थी नमी।
अचानक से नज़र पड़ी, उस पूर्णिमा के चांद पर।
उसकी चांदनी ने एहसास दिया तेरे नूर का मेरे दिल पर।
….$❤️….✍️

शुभम् लांबा

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