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एक संकल्प बालिका दिवस पर-माधुरी-कुमारी-318

परम्पराओं की जंजीरो में
जकडी दुनिया की रीत
कन्या को मरवा दो कोख में
पहले ही लडके कि खोज में
क्या वजा रही होगी माँ
जो तु ने मुझसे मुख मोड लिया
तेरे बगीया की कली थी
खीलने से पहले ही तोड लिया
में ही तो हुँ,एक मात्र जीवन का आधार
क्यो तु भुल रही
एक तो दे मौका छु लु
आकाश की ऊँचाई को
ना ना तु न आना, जालीम दुनिया में
सयानी होते ही नोच खाएगा जमाना
ना ना तु न आना
इतनी जल्दी हार गई माँ
इस जालीम दुनिया से
याद कर उस देश क बेटियाँ को
देख जो छु रही आकाश की बुलनदियाँ
तु भी तो उसी देश की बेटि हैं माँ
जिस देश की साइना नेहवाल
जिस देश की रानी लक्ष्मी बाई
फिर कयो तु हीमत हार रही
इस बालिका दिवस पर कर एक संकल्प
चाहे जैसी भी हो परिस्थितियाँ
हम लडते जाएगे माँ
पर कन्या भ्रुण हत्या कभी न
अपनाएगे माँ

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