एक सूरत “तेरे ख्याल” – जीतपाल सिंह यादव आर्यवर्त

एक सूरत “तेरे ख्याल” – जीतपाल सिंह यादव आर्यवर्त

फूल, सवनम, बहारों में, जो सूरत आज देखी थी।
मौहब्बत के तरानों में बड़ा मदहोश आलम था।

कभी दिल के झरोखों में, जिसे महसूस करता था।
वही सूरत अचानक आज मैंने , पास देखी थी।।

मगर दिल की कसमकस में फंसा सा रह गया केवल।
न उससे बात कर पाया, तपन महसूस की केवल।

ज्यों सागर में उठे तूफां तड़पता है किनारों को।
वही हालत मेरे दिल की, पलट पर आज होती थी।

तुम्हारे इश्क की खुशबू, मेरी रग रग में बसती थी।
निगाहों से इसारा वो जो महफिल बीच करती थी।

मगर मेरी वेबसी का यह आलम कातिला निकला।
मैं मिल कर भी नहीं मिलता क्या किस्मत खेल करती थी।

कभी तपती दुपहरी में, कभी काली अंधेरी में।
मैंने तुमको सदा देखा कभी चंदा चकोरी में।

मगर मैं तो धरा पर था तू जाकर बस गया ऊपर।
उन्हीं ऊँची उड़ानों की मैंने एक शाख देखी थी।

हवाओं में वही खुशबू वही रंगत समाती थी।
मगर तुम तो नहीं आते, तुम्हारी याद आती थी।

कह रहा हूँ, फिजाओं से, हाल जाकर कहो मेरा।
बिना आँसू मैं रोता हूँ, भरोसा अब भी है तेरा।

तू आयेगा यह आशा है, वक्त कुछ कह नहीं सकता।
उम्र सारी वही यादें ख्यालों में रूलाती थीं।

Jitpal Singh Aryvatजीतपाल सिंह यादव आर्यवर्त
सम्भल उत्तर प्रदेश

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