“इंजीनियरिंग” में दाखिला – सचिन ओम गुप्ता

“इंजीनियरिंग” में दाखिला – सचिन ओम गुप्ता

आई.आई.टी. व ए.आई.ई.ई.ई. की परीक्षा देकर जब हम घर आए,
अब बारी आई स्टेट परीक्षा की और हम खुद को लोकल यूनिवर्सिटी के हवाले कर आए|

सारे चेहरे थे नए और हम सब थे अनजान,
लेकिन इस भीड़ में तो हमें बनानी थी अपनी पहचान|

सब दिखते थे मासूम और सबको था रैगिंग का डर,
क्या पता था कौन सा सीनियर आ जाए किधर|

दिन गुजरतें गए और फ्रेशर पार्टी आ ही गई ,
पता नहीं चला कब हमारे बाजू में एक हसीना आकर बैठ गई|

फिर बनाए हमने कई सारे दोस्त और शुरू की बाते,
एक लेक्चर अटेंड कर, दिन भर कैन्टीन में गप्पे लड़ाते |

हम सब हमेशा क्लास में घुसते थे लेट,
और टीचर हमें कहता “गेट आउट फ्रॉम द गेट”,

वो क्लास की लास्ट बेंच में बैठकर हमने टीचर की हसी उड़ायी,
और लेक्चर के बीच में हमें उबासी मारकर गहरी नींद आयी|

वो सेमेस्टर आने पर नींद का उड़ जाना,
और लास्ट टाइम पर अपनी किस्मत को एस.पी. पर आजमाना|
(मैं आर.जी.पी.वी का विद्यार्थी था तो मैंने शिवानी पब्लिकेशन को आजमाया,
और आप लोग यहाँ अपनी-अपनी यूनिवर्सिटी के पब्लिकेशन आजमा लो )

अब आयी रिजल्ट की बारी,जो उड़ा देता है होश,
जो पास हो गए वो होतें है खुश,जो रह जातें हैं वो हो जातें है बेहोश|

हम भी अब बन गए हैँ सीनियर, आ गया है थोड़ा गुरुर,
मेरे प्यारे जूनियर्स हो जाओ तैयार क्योंकि हम रैगिंग लेंगें जरूर|

Sachin Om Guptaसचिन ओम गुप्ता,
चित्रकूटधाम

 (उत्तर प्रदेश)

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