गजल-आहटे सून के ना जाने क्यों – आनंद मिलन

गजल-आहटे सून के ना जाने क्यों – आनंद मिलन

आहटे सून के ना जाने क्यों आज
कमवकत दिल मेरा मचलने लगा,
पहले ना कभी ऐसा हुआ कि
खुद ही कदम उस ओर उठने लगा……।

साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात प्रतिभागियों को 501/- रुपये प्रति व्यक्ति

मुद्दों से छुपाया था अपने दिल में
द से दर्द उन हसीन जख्मो को,
जाने क्यों ऐसा लगता हैं फिर से
कोई मरहम लगाने को बुलाने लगा……।

घर का कौना-कौना खाली सा लगे
या द से दिल अपना सुना-सुना सा लगे,
है आज भी यही उम्मीद कि दरवाजे पे
खड़ा कोई हमें आवाज लगाने लगा……।

गीला करू भी तो किस से करु
म से मंजूर यही शायद रब को था,
नजरों के “मिलन” में कमवकत ये
नादान दिल मेरा चोट को खाने लगा…….।

Anand Milanआनंद मिलन
नेरूल/नवी मुम्बई

गजल-आहटे सून के ना जाने क्यों – आनंद मिलन
5 (100%) 2 votes

साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात प्रतिभागियों को 501/- रुपये प्रति व्यक्ति

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account