गजल-आहटे सून के ना जाने क्यों – आनंद मिलन

गजल-आहटे सून के ना जाने क्यों – आनंद मिलन

आहटे सून के ना जाने क्यों आज
कमवकत दिल मेरा मचलने लगा,
पहले ना कभी ऐसा हुआ कि
खुद ही कदम उस ओर उठने लगा……।

मुद्दों से छुपाया था अपने दिल में
द से दर्द उन हसीन जख्मो को,
जाने क्यों ऐसा लगता हैं फिर से
कोई मरहम लगाने को बुलाने लगा……।

घर का कौना-कौना खाली सा लगे
या द से दिल अपना सुना-सुना सा लगे,
है आज भी यही उम्मीद कि दरवाजे पे
खड़ा कोई हमें आवाज लगाने लगा……।

गीला करू भी तो किस से करु
म से मंजूर यही शायद रब को था,
नजरों के “मिलन” में कमवकत ये
नादान दिल मेरा चोट को खाने लगा…….।

Anand Milanआनंद मिलन
नेरूल/नवी मुम्बई

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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