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गज़ल (सूनी आंखों में)-Study-KSF

सूनी आंखों में रंगीन नज़ारों के लिए,
दिल के गुलशन में दिलकश बहारों के लिए
था चांद से दोस्ती का इरादा किया,
दामन-ए-बेकस में कुछ सितारों के लिए,
पैगाम-ए-ख़ुशी का एक फूल था आंचल में गिरा,
हो गई मुश्किल चमन में ये ख़ारों के लिए
मशाल-ए-मसर्रत हर क़दम पे बुझ गयी है मेरी,
हसरत-ए-मोहब्बत में उनके इशारों के लिए
गुज़रते वक़्त से अक्सर ये कहा करते हैं हम,
लम्हा ख़ुशी का कभी लाओ ग़म-ए-बीमारों के लिए
दर्दे-ए-ग़म से टूटते हैं कितने लोग दुनिया में,
और कहीं ‘नूरी’ है महफ़िल हज़ारों के लिए
….. के. जहाँ ‘नूरी’ ग्राम- धिरावां, गोला- खीरी

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