गीत -तृषा द्विवेदी

गीत -तृषा द्विवेदी

बिगड़ा था मुकद्दर जब वो दौर आ गया, लगता नया तूफान कोई और आ गया । न देखी हमने धूप,न देखा हमने छाँव , जलती हुई आग में जले थे मेरे पाँव, फिर से गमो का सर पे आसमान छा गया । लगता नया तूफान…………………………। अपने सभी हैं छूटे, सपनें सभी हैं टूटे , बस
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गाना-ओम कांति

1-जब से आंखे खामोश रहने लगी , तबसे पलके कहानी लिखने लगी । 2-ए मेरी आंखो का रहम है। जो आए हो तुम सामने । 3-तेरी आंखो मे नाव चलादूं , वो मेरे जानम ।मै अश्के किनारे लगादूं, वो मेरे जानम । 4-बहुत खूबसूरत जख्म मिला है, टूटा दिल दिया है टूटा दिल लिया है
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गीत-ओम कांति

1-मुझसे आंखे मेरा दिल चुराने लगा है, उनसे चुपके से मिलने जाने लगा है । 2-बहुत खूबसूरत जख्म मिला है, टूटा दिल दिया है टूटा दिल लिया है ।       ओम कांति 0

पहला प्यार- श्रीलाल कुशवाह

प्यार कर लो प्यार कर लो, कहता है- ये दिल इकरार कर लो एक- बार कर लो,कहता है- ये दिल . ..मैं- तुमसे प्यार करता हूं, मुझे तुमसे प्यार है बार- बार कहता है- ये दिल दिल की सुन लो,दिल की धडकन सुन लो,जान लो कहना दिल का मान लो कर लो मेरा यकीं मेरा
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मेरी माहीये -श्रीलाल कुशवाह

ओ- माही, मेरी माहीये एक तू ही मुझे चाहीये तू तो जानती है दिल की धड़कन क्या बोले है-… क्या-?, ..सुन-, ….ओ- माही, मेरी माहीये,एक तू ही मुझे चाहीये दिल मेरा ले,ले-जां मेरी ले,ले दिल के बदले जहान मेरा ले,ले मान मेरा ले,ले-इमान मेरा ले,ले..मेरा सबकुछ ले,ले पर-.. दे, दे- मुझे अपना दिल मुझे-खुद में
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तू आके मिल-श्रीलाल कुशवाह

तू- आके मिल कहता है- दिल ओ- माहीया सोणी गिल अ,-आजा दिल मेरा ले,ले अ,-आजा दिल मुझे दे,दे अ, -आजा दिल मेरा ले, ले, चुरा- ले, अ, दिल से मिला ले दिल तू- आके मिल कहता है- दिल ओ- माहीया सोणी गिल मैं- बेकरार हूं, तेरे लिए तेरे लिए- तेरे प्यार के लिए तू- खुद
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दिल तेरा दीवाना-श्रीलाल कुशवाह

दीवाना है-, दिल तेरा दीवाना है ..पागल है, मुश्किल है, मुश्किल- इसे समझना है, समझाना है ||२|| दीवाना है-, दिल तेरा दीवाना है… .. . तू दिल में रहती है, दिल की धड़कन में रहती है आजकल- हरघड़ी-हरपल, हरपल ही पलपल, तेरा ख्वाबो-ख्याल दिल में रहता है तुझे-देखके बड़ा ही अच्छा लगता है,दिल-तुझे चाहता है
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दीवानापन-श्रीलाल कुशवाहा

दीवाना- दीवानापन,क्या कहता है- जाने-जां,जाना-जानेमन सुन जरा सुन, सुन जरा-जरा सुन… .. . ऐ- दिलवर -आ, रुक- जा जरा, जरा पल दो पल ठहर- जरा ठहर पल दो पल, रुक-जा जरा.. . . ..जरा जी भर के तुझे देख लूं . ..ऱख लूं तुझे अपनी अलकों-पलकों में बंद कर लूं अपनी आंखों में.. . .
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आजकल-श्रीलाल कुशवाह

देखा है-.. . जबसे- तुझे, तबसे-.. .आजकल, आजकल- हरघड़ी-हरपल, हरपल-ही-पलपल, हरवक्त-आठों-पहर, दिल- ये तुझे सोचता है ..तुझे- सोचता है,-देखता है, देख के-.. हलके- हलके, ख्वाबो-ख्याल में दिल के ||२|| देखा है-.. . जबसे- तुझे, तबसे-.. .आजकल.. . आजकल-, -आज, कल- कल करते -आजकल पे ही अटका हूं . ..पलपल- तुझे -सोचता हूं, तुझे-सोचता हूं,-देखता हूं,
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क्या यही प्यार है – श्रीलाल कुशवाह

जाने क्या हो गया है,-आजकल मुझे आंखों-आंखों में-,.. . चाहूं हरपल तुझे दिलकश! ये घड़ी-.. . दिलकश! ये घड़ी है- बेचैन बड़ी, . ..निहारूं पलपल तुझे जाने क्या हो गया है,-आजकल मुझे.. . धड़कन-धड़कन करे क्या बयां, कोई न जाने क्या हैं अरमां दिल की बातें दिल ही जाने, दिल ही समझे दिल की जुवां
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