चुनर हिंदुस्तानी – श्याम कुँवर भारती

चुनर हिंदुस्तानी – श्याम कुँवर भारती

मेरी रंग दे रे रंगरेज चुनर हिंदुस्तानी | हरा केसरीया रंग सादा मदद मेहरबानी| मेरी रंग दे रे रंगरेज चुनर हिंदुस्तानी | हरी रहे धरती न पड़े कभी परती | खेत खलिहान गेंहू बाल चटकी | शांति बयार बहे मस्त ज़िंदगानी | मेरी रंग दे रे रंगरेज चुनर हिंदुस्तानी | आओ पिया आओ तेरी आरती
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ईश्वर की रहमत-शोभा

अगर हो तेरी रहमत ,तो जिन्दगी का सफर खूबसूरत लगता  है तेरी  ही  दुआओं के  करिश्मे  से  हर  डगर  मेला  सा  लगता  है तुझसे  ना हो फासले  ना ही शिकवा गिला मुझे तो  हर जगह  हर रूप  में  तू  मिला तेरे  ही  अटूट  हौसलो  से  तय  कर  रहा    हू  लम्बा  सफर तुम ही हो 
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शमशान-थानसिंह मीणा

अब आदमी की लसलसी जुबान है, क्यों कहता है कि जिन्दा  स्वभिमान है ! बुद्धि और धन  दोनों ही नतमस्तक है, सोचो अब किसका ऊँचा यहाँ मचान  है! अम्बर  भी आखिर जमीं  पर रगड़ा है, तुलसी के अंकुर का यही बयान है ! चुटकी भर सिंदूर मिला क्या विमला को, रजनी  के संग  तानसेन की 
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मेरे भाई कैसे रहेंगे आबाद-अनुश्री दुबे

कैसे काटूं मैं सुकूं की रात…. कैसे कहूं मैं अपनी बात…. मेरे भाई कैसे रहेंगे आबाद । तंबाकू खाके हो रहे बर्वाद। अभी न कांपे तुम्हारे हाथ। फिर कौन देगा तुम्हारा साथ। तंबाकू की ये आदत छोड़ो। भले काम से मुंह न मोड़ो। कैसे काटूं मैं सुकूं की रात…. कैसे कहूं मैं अपनी बात…. मेरे
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गीत-उदय प्रताप

ये वादियो की गुजारिश है हवावों की सदा ऩजर मे प्यार की चाहत लिये बुलायेगी ये वादियो की गुजारिश है….. सवाल कौन करेगा जबाब किससे मीले तमाम अनकही बाते तुम्हे सतायेगी…..- नजर मे प्यार की चाहत लिये बुलायेगी कहा मिले थे कहाॅ बिछङे कुछ खबर ही नही मेरी खामोशिया  ही वाकया सुनायेगी नजर मे प्यार
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उड़े धुँआ जले खून-अभी राजा फ़रुर्खाबदी

देखो  आज काला हो गया ✍गोरा  गोरा  सा  प्यारा  मूँन भाइयों हर तरफ खाली  खाली लगते  पिता  बिन  सजे  घर सून वो  माँ आज   पल पल  है रोती याद कर कर हरजाई माह जून लगता है वो आज मुझसे रूठा है सावन में  भाई भाई  पुकारे बहन क्यों सताता है तूँ मुझको इतना चाहता हूँ
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मेरा कैसा हाल है-अनुश्री दुबे

यहां मिलता नहीं जबाब कहीं कैसा सबाल है। ऐ ईश्वर मेरे देख अब मेरा कैसा हाल है। छोटी हूं माना न है अभी कोई बजूद मेरा; मगर फिर भी मेरे दिल में कैसा मलाल है। हर घड़ी दुखद मंजर बनी दिल-ए-जमीं बंजर बनी; देखो ऐ ईश्वर मेरे ये मन में कैसा बबाल है। सच में
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कि लोग क्या कहेगें-अनुश्री दुबे

कि लोग क्या कहेगें………. तब सब कहते हैं……… कि लोग क्या कहेगें………. तुम याद रखना तुम्हारा डुपट्टा कहीं गिर न जाये। किसी लड़के की नजर तुम पर फिर न जाये। कि लोग क्या कहेगें………. अब कोई नहीं कहता……. जब इन दरिंदों का रोज शिकार होती हैं बेटियाँ। जब इंसाफ पाने को हर पल रोती हैं
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रे कोई पागल कहता है-अनुश्री दुबे

रे कोई पागल कहता है। तो कोई बादल कहता है।-2 मेरे कहने का नया अंदाज होता है। नयी खुशियों का नया आगाज होता है। रे कोई पागल कहता है। तो कोई बादल कहता है।-2 शीप में है नया मोती। आँखों में है नयी ज्योति।-2 मैं आँखों देखा वो नया सबेरा भी। मैं वो नयी नदिया
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एक तरफ़ा प्यार-शिवम् कुमार

हो हो हो , हो हो हो , हो ओ……., हाँ तुमसे , हाँ तुमसे, हाँ तुमसे , प्यार किया है रे.., प्यार किया है रे तू..है की जा..नी अंजा..नी -2 हाँ तुमसे, हाँ तुमसे , हाँ तुमसे , प्यार किया है रे.., प्यार किया है रे यूँ इस कदर मेरे नजरों से खेला न
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