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माँ तुलसी-अंशु कुमत

गीत – पत्ता पत्ता वही, डाली डाली वही
गुमसुम गुमसुम कहीं, खोई खोई रही
बीती यादें कई, कई बातें रहीं
कई रातें रहीं, गुनगुनाती रही
अपने सपने को यूं सजाती रही

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