ओह साथिया – चेतन वर्मा

ओह साथिया – चेतन वर्मा

ओह साथिया…..😚
जाऊं तो जाऊं कहां…..🤔
तेरे बिना मेरा कोई नहीं यहां…..😔

ना दूरी सही जाती है ,
ना बात किए बिना रहा जाता है ,
तेरा मेरा रिश्ता कुछ अजीब है ,
तू रुठ जाएं तो मनाने में चला आता हूं ,
मैं रूठ जाऊं तो साथ देने तू चली आती है ,
कुछ नाम भी नहीं है इस रिश्ते का
फिर भी मेरे दिल-का-राज तू समझ जाती है ,

मिलना चाहता है , यह दिल❤
तुझसे कही दिनों से
तेरे बिना एक पल ना ही कल चाहता है ,
तू नाराज है , मुझसे शायद

आखिर तू ही बता…..🙃

ओह साथिया…..😚
जाऊं तो जाऊं कहां….🤔
तेरे बिना मेरा कोई नहीं यहां…..😔

chetan vermaचेतन वर्मा
(बूंदी ) राजस्थान

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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