गोताखोर-शोभा सृष्टि

गोताखोर-शोभा सृष्टि

मन रूपी सागर में लहरे उठती रहती है
निरन्तर। कभी वेग में धीमापन ,
कभी पूर्ण आवेग होता है। ये लहरे अदृश्य है,
फिर भी चेहरे पर भाव दृश्य होता है।
यू तो सागर को निहारने वालो की कमी नही,
लेकिन जो सागर मे जाकर मोती चुने वही असली” गोताखोर ”होता है।

शोभा सृष्टि
 राजस्थान

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