गुड़िया हूं मैं -चेतन वर्मा

गुड़िया हूं मैं -चेतन वर्मा

बाबुल तेरे आंगन की
एक छोटी सी गुड़िया हूं मैं…

न जाने-अनजाने गुमराह से
बच निकली मैं
दुनिया को मुंहतोड़ जवाब देने आई हूं मैं
जो मुझे मार देते हैं अपने लालच के लिए
उनका विनाश काल-विपरीत बुद्धि बताने आई हूं मैं
बाबुल तेरे आंगन की
एक छोटी सी गुड़िया हूं मैं…

जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो
ऑटो-रिक्शा ट्रेन तक को चलाने लगी मैं
साहस के साथ अंतरिक्ष भेद कर
वायुयान जैसे विमान को उड़ाने लगी मैं
बाबुल तेरे आंगन की
एक छोटी सी गुड़िया हूं मैं…

डरती हूं बाबुल तेरी इज्जत से
वरना दो कौड़ी के लोगों को
अपनी औकात दिखा दूं मैं
पैदा होने से लेकर मरने तक
कितना कुछ सहकर भी हार नहीं मानती में
बाबुल तेरे आंगन की
एक छोटी सी गुड़िया हूं मैं…

 

 चेतन वर्मा

बूंदी,राजस्थान

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account