गुजरा हुआ कल-सूरज कुमार

गुजरा हुआ कल-सूरज कुमार

याद करता हूँ वह गुजरा हुआ कल तो
बहुत सारी यादो से रुब-रुब हो जाता हूँ
कुछ यादे तो अच्छी होती है
और कुछ यादे तो दर्द दे जाती है
अच्छी यादो को तो याद कर के अच्छा लगता है
तो कुछ दर्दनाक यादो को सोच कर आँख भर आती है
उन यादो से कुछ सिखने को भी मिलता है
अपनी गलतियों को सुधारने को याद दिलाता है वह गुजरा हुआ कल
बीते हुए कल का और आज का फर्क समझाता है गुजरा हुआ कल
जिंदगी को आज में जीने और बीते हुए बातो को भूल जाने को कहता है गुजरा हुआ कल
बीते हुए कल को भूल कर आगे बढ़ने को कहता है गुजरा हुआ कल

 

           सूरज कुमार

         दानापुर, पटना

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