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हमारा गांव-बलराम-सिंह

गांव हमारा सबसे प्यारा,अपना जन्म स्थान है
उस मिट्टी को नमन करो,वो मिट्टी बड़ी महान है।

यहां रोज सवेरे कोयल गाती,उनकी अपनी शान है।
रोज सवेरे तोता हमको,याद दिलाती राम है।

यहां रोज सवेरे किसान अपने ,खेतों में करते काम है।
यहां रोज सवेरे बंसी बजाते,गिरधर की तो नाम है।

नीला अम्बर नीला नदियां,हरियाली खेतों की शान है।
पेड़ पौधे और बाग बगीचे,ईश्वर की वरदान है।

यहां ना होता शोर शराबा,ना प्रदूषण की विकाश है
यहां ना होता पवन विषैला,ना जल की अपमान है।

जहां बूढ़ा पीपल राह निहारे, बच्चों की किलकारी को
जहां पर्व भी उत्सव मानते,प्रेम भरी बखारी की।

संस्कारों की मरण हुआ है,शहरों की गहराई में
वहां मर्यादा रो रही है,मरघट की तन्हाई में।

धर्मो का हरण हुआ है, फैशन की परछाई में
नारी लज्जा बेच रही है,मर्दों की अगुवाई में।

शहर वाले का क्या कहना,उनकी तो मजबूरी है।
बिश्य फैला हो अम्बर में,तो भी पीना उन्हें जरूरी है।

खुली आसमा खुली हबाए,खुली हुई आजादी हैं
शहर की बर्गर से कहीं अच्छा, गांव सुखी रोटी प्यारी हैं।
गांव हमारा सबसे प्यारा,अपना जन्म स्थान है।

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