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हंसाया क्यों – चेतन वर्मा

जब रुलाना ही था
तो हंसाया क्यों
हंसा दिया तो
गले लगाया क्यों
गले लगा कर भी
आंसू बहाए क्यों
आंसुओं से कीमत
अदा करते हो क्यों
अदा करना ही था
तो दिल दुखाया ही क्यों

माटी के मिट्टी को
महक बनाया ही क्यों
वक्त कटे ही रहा था
हाथ मिलाया ही क्यों
प्यार बेइंतहा था दिल में
नफरत के दीए जलाए ही क्यों
पत्थर दिल इंसान को पिघला दिया
पिघलाकर मोम दिल इंसान बनाएंगे

chetan vermaचेतन वर्मा
(बूंदी )राजस्थान

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Chetan Verma

Chetan Verma

मैं चेतन वर्मा बूंदी राजस्थान का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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