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हिमालय-पीयूष-जोशी

‘हिमालय’

गर्व है तुम पर ऐ प्रहरी! विशाल,
तुम हो मां भारती के उन्नत भाल।
तुमसे ही है पहचान हिन्दुस्तान की,
हाँ तुम्ही तो हो शान हिन्दुस्तान की ।

तुम्ही तो हो सदा शिव की लीलास्थली,
तुम्हारी सरिता जल से यह धरती पली।
माँ भारती के महा पाप तारण के लिए,
तुम्ही से ही तो गिरीराज माँ गंगा चली।

योग आयुर्वेद तप का सद्ज्ञान तुम हो,
इस धरती पर ईश का वरदान तुम हो।
तुम्ही से पाया मोक्ष मार्ग मनस्वीयों ने,
तप करना सीखा तुमसे हीं तपस्वियों ने।

भारतीय संस्कृति पली तुम्हारी तलहटीं में,
इस जग जीवन मे प्राण का संचार हुआ है।
है हिमालय तुम्हारें द्वारा ही इस जगती में,
जीवन की नियमितता का उपकार हुआ है।

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