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हम सदाचार बनी-बलराम सिंह

नित्य उठी हम अमृत बेला, मात पिता क करी प्रणाम
गुरुवर क हम ध्यन ध क,तखन ली भगवानक नाम।

नित्य क्रिया स निपैट क, तख्ण करी हम अस्नान
याद रखी हम बोरक आदर,छोटक करी सनेहक दान।

सदखन हम मीठे बाजी, किनको नै हम करी अपमान
एक दोसर के हाथ बटाबी,मिलजुइल क हम निपटी काम।

सांच बजाई क प्रण ली हम,झुठक नै करी गुण गान
देश प्रेमक जज्बा राखी, तखन होयत जग में नाम।

बलराम सिंह की अपनी कलम से

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