इल्ज़ाम-पूजा चौहान

इल्ज़ाम-पूजा चौहान

दर्द से लिखने की शुरुवात की
पर अब दर्द नही है आराम है
मेरे लिखने का तरीके को लोग
मुझसे जोड़ने क्यूँ लगे है l
सारा दर्द सिर्फ़ मेरा नही कुछ उधारी का भी था
मेरी सच मे शक्सीयत क्या है इसकी
उनको क्या पहचान है l
इस उम्र मे मेरा इतना संजीदा लिखने पर
इस कदर वो हैरान है l
मैने लिखने मे बस एहसासो को उतारने
का एक सफर है l
मै ग़ालिब तो नही हूँ जो दर्द ही मेरा हमसफ़र है
कोई कहता नही मुझे कुछ
मेरा हर रिश्ते मे एक मान है l
मै बड़ी ग़मगीन रहती हूँ बस मुझ पर यही सबसे बड़ा इल्ज़ाम है l

 

पूजा चौहान

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