इस दौर वाला सच्चा प्यार-भावना पांडेय

इस दौर वाला सच्चा प्यार-भावना पांडेय

भागते से इस दौर में ये दोनों थोड़ा पीछे चल रहे थे ,
शायद एक दूसरे का ही इंतजार कर रहे थे ।
बिलकुल नहीं जानते थे एक दूसरे को ये,
इन्होंने तो एक दूसरे के शहरों के नाम तक नहीं सुनें थे ।
फिर क्या ले आया वक्त करीब इन्हें,
उसे एक कहानी कि शुरुआत जो करनी थी,
दोनों शहरों की दूरियाँ ७०० से २० किमी जो करनी थी ।
२०१३ में कालेज में एडमिशन लिया लड़की ने,
जिसमें उनकी बहन भी पढ़ती थी,
इस कहानी कि शुरुआत इनकी दोस्ती से जो होनी थी ।
घर वालों के जिक्र में उनका भी जिक्र जब होने लगा,
कुछ अजीब सा एहसास इधर से उनके साथ जुड़ने लगा ।
देखा भी नहीं था एक दूसरे को इन्होंने फिर भी एक दूसरे को जानने ये लगे थे,
बस एक दूसरे कि बातें सुन इनके व्यक्तित्व कि कल्पना जो करने लगे थे ।
कुछ दिन बीते ओर एक दिन उनकी तस्वीर देखने को मिली,
ओर यही से इनकी बात आगे बढ़ी ।
इसे वो अच्छे लगे उन्हें पता चल गया था,
ओर फिर उन्होंने बात करने की कोशिश शुरू कि।
इनके अच्छे वक्त की शुरुआत एक घड़ी से हुई,
जिसमें कुछ कमी थी जो उन्होंने सही करा के दी।
फिर क्या समझदार बहुत थे जनाब,
तो इससे शुक्रिया सुनने कि फरमाइश उन्होंने कि ।
कुछ दिन बीतने पर जब कोई जवाब नहीं मिला,
तो कहने लगे उसने मुझे अभी तक शुक्रिया नहीं कहा ।
ये सुनकर एक दिन मैसेज उन्हें किया गया,
उसी के तुरंत बाद उनका फोन भी आ गया ।
घबराते हुए दोनों ने थोड़ी सी बात कि,
ओर अपने नये रिश्ते की हल्की सी शुरुआत कि ।
एक दूसरे से बात करने का बहाना ढूंढ ही रहे थे,
लेकिन ना जाने किससे डर रहे थे ।
कुछ दिन बीते ओर दिवाली आयी,
बात करते हुए कहा मैंने सुना आपको मेरी तस्वीर पसंद आयी ।
हां इधर से सुन के थोड़ा खुश हुये,
बिना कुछ कहे दोनों बहुत कुछ समझ गए ।
जिस दौर में सुन्दरता बहुत मायने रखती है,
इन्होंने तो अभी तक इसे देखने की चाह भी नहीं कि।
बातें घरवालों से छुपकर रोज होने लगी,
ओर एक सुंदर से रिश्ते की शुरुआत होने लगी ।
मासूम से इनके दिल जो दिल में आया बोलते चले गए,
बस इसी तरह एक दूसरे को अच्छे से समझते चले गए ।
साल बीतने को आया पर इन्होंने कभी इसे देखने या मिलने की फरमाइश भी नहीं कि, ओर इन सब को लेकर कभी कोई शिकायत भी नहीं कि ।
फिर एक दिन उनके घर जाना हुआ इसका,
तब पहली बार इनकी मुलाकात हुई ।
लेकिन पापा घर थे उनके,
तो कोई बात नहीं हुई ।
इतना पास रहकर भी साल में एक ही बार मिल पाते हैं,
उन चंद हसीन पलों की यादों में साल भर मुस्कुराते हैं ।
लड़ाई ओर रूठना मनाना बहुत कम हुआ इनके बीच में,
क्योंकि बिना कहे ही एक दूसरे कि बातें आ जाती है इनके समझ में ।
कालेज के ३ साल खत्म करके इसे फिर से दूर जाना था,
बस शहरों में दूरियाँ आयी दिलो में तो नजदीकियो का ही जमाना था ।
२ साल दूर रहने पर भी ना एहसास बदले इनके,
ना शिकायतों ने जगह घेरी इनके एहसासो में
जब वापस करीब आये तो ओर भी ज्यादा मोहब्बत हे इनके दिलो में ।
चल रहा है ये सफर हमसफर बनने की उम्मीद में,
क्योंकि ऊपरवाले कि हां जो अभी बाकी है ।

 

           भावना पांडेय

        भिवाड़ी,राजस्थान

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comments
  • heart touch

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  • Bhot hi umda tariqye s pesh kya aapne in Mubabbat k palo ko

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