इस कदर…(चेतन वर्मा)

इस कदर…(चेतन वर्मा)

किसी के इंतजार में
रातों के अंधेरे में
तारे गिन गिनकर
बेचैन सुबह दम तोड़ती है ,
इस कदर..

किसी की यादों के मंजर में
दिन के उजाले में
तड़कती भड़कती आग में
बेहोश शाम झिलमिलाती है ,
इस कदर…

किसी के गुजरते वक्त के मरहम में
सुबह के फूहार में
दिल तोड़कर
हंसती रात हो जाती है ,
इस कदर….

चेतन वर्मा
(बूंदी) राजस्थान

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