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इसबार-धनश्री खाड़े

इसबार ……..

तूने मेरे प्यार
मेरे विश्वास
खुद मुझे
यहां तक कि मेरे आत्मा को भी तोड़ा है |
कैसे माफ करूं तुम्हें इस बार ?
तुम अब माफी के लायक भी नहीं रहे |

सजा भगवान देगा
इंसाफ भगवान करेगा
इस भरोसे बैठना मुझे मंजूर नहीं
इंसाफ तो मुझे चाहिए
कर्म के भरोसे तुम्हें कैसे छोड़ दू इसबार
क्योंकि तकलीफ का दर्द तो सिर्फ मुझे हूवा है |
भगवान को नहीं

ज़िंदा थीं
ख़ूश थीं
जीं रहीं थीं जिंदगी
अपने हिसाब से
यू सपनों को चूर चूर करके
जाने वालें बूजदील
क़ेसे माफ करु तुम्हें इसबार

नफरत है मुझे तेरी सूरत से
तेरी बातों से
तेरी यादों से
तेरे झूठे प्यार से
अब लाख कोशिश कर इसबार बचनेक़ी
जब तक जिंदा हूं
ना तुझे जीने दूंगी
ना खुद जिऊंगी

सलाहाँ तों लाखो देंगे
लेकिन सुकून तो कभी वापस नहीं आएगा
जो खोया है मैंने मेरी इज्जत
वो दुबारा नहीं आएग़ा
मुझे पता है इस दुनिया में
मैं अकेले ही ऐसीं लड़की नहीं हूं
लेकिन ए जिंदगी मुझे फिर से नहीं मिलने वाली
अब खुद को इंसाफ नहीं दुंगी
तो सुकून से मर भी नहीं पाऊंगी

-धनश्री खाडे

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