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जब ये अपना रंग दिखाएगा-आराधना सिंह

बहुत दुःख देगा ये तुमको लगाओ न कभी लत इसकी
जिसको गम में साथी बनाते हो यही बेवफाई करेगा तुमसे कभी
पल भर का तो सुकुं देगा तुमको पर जिन्दगी भर ये रूलाएगा
जीवन के सुन्दर हिस्से को जब ये आहार बनाएगा।
आज चबाओ तुम इसको कल तुम्हे ये चबा जाएगा
आनन्दमयी तुम्हरे इस जीवन को दुःख के अथाह सागर मे डुबा जाएगा
सोचा न होगा जो कभी तुमको ये वो दिन दिखाएगा
अपनो से तुम्हे जुदा कर देगा और अपने साथ ले जाएगा।
कोसोगे खुद को तब तुम उस दिन जब तुमसे अपने भी बिछड़ जाएंगे
सोचोगे तब उस दिन तुम की ये बुरी लत लगायी क्युं
तुम फिर पछतावोगे की ऐसे साथी को गले लगाया क्युं
पर तब रोने से क्या होगा जब तम्बाकू ही तुझे गले लगा जाएगा
तो छोड़ दो भईया ये तम्बाकू खाना क्युं की एक दिन ये अपना रंग तुझे दिखाएगा।
                                           धन्यवाद।
        आराधना सिंह                                                                      

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Ravikant Agarwal

Ravikant Agarwal

मैं रविकांत अग्रवाल पुणे महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवी हूँ। मैं साहित्य लाइव में मुख्य संपादक तथा दिशा-लाइव ग्रुप मे प्रेस प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ।

5 thoughts on “जब ये अपना रंग दिखाएगा-आराधना सिंह”

  1. 544963 881000I dont agree with this specific post. Nevertheless, I did researched in Google and Ive found out that you are correct and I had been thinking within the incorrect way. Continue producing quality material similar to this. 420901

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