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जज़्बात-रक्स्य भाई

ज़िन्दगी के भागदौड़ में
रास्तों के मुसीबत में
अच्छे-बुरे की राह में
कम्पटीशन के ज़माने में
इन कुदरती लम्हों ने,
भिड़ने मुसीबतों से सिखाया
मुसीबत के घड़ी में,
जूझने और सवँरने सिखाया
कम्पटीशन के दुनिया ने,
स्वयं से सवाल करने सिखाया
कुछ करके दिखलाना है!
कम्पटीशन की दुनिया है यारों,
कुछ करके दिखलाना है l
मुसीबतें आते है,
तो कामयाबी खिलते है l
डटे रहना सिखाया
मुसीबत से भागना नहीं,
मुसीबतों को पछाड़ने सिखाया l
कुछ करके दिखलाना है !
कम्पटीशन की दुनिया है यारों,
कुछ करके दिखलाना है l
रात आते है,
किसीको सुलाते, किसीको रुलाते है !
हमें विश्वास यहीं बनाए रखना है
तकलीफो के शीश झुकाना है
भागदौड़ की जिंदगी में,
अब कुछ करके दिखलाना है l
जज़्बा रखो जीतने का क्योंकि
‘किस्मत’ बदले न बदले,
पर वक्त जरुर बदलता है l
भागदौड़ के ज़िन्दगी में,
अब निकला हूँ,
तलाशने स्वंय को
जाने-अनजाने,
किन चरम परिस्थितियों से,
गुजरने के बाद मुलाक़ात,
स्वंय का स्वंय से होगा ll

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