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जल जीवन है-निर्दोष-कुमार

सबकी प्यास बुझाता जल।
जलती आग बुझाता जल।
प्रकृति के साथ साथ हर,
मत्स्य का जीवन होता जल।।

बुढिया ने एक लोटा जल।
दिया था डाकू को उस पल।
मानो प्यास के मारे जैसे,
हो गया हो वो अति निर्बल।।

इसके बिना ना दूजा हल।
प्यास में हृदय मांगे जल।
जान लो हर जीवन में,
अहम भूमिका देता जल।

सोचता रहता हूँ हर पल।
देख व्यर्थ का बहता जल।
अंकुश इस पर नहीं लगा तो,
“विन” जल के जग जाएगा जल।।

               कवि 

…✍️निर्दोष कुमार “विन”
(बरेली)

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