जीवन बीता जाये (गीत)

जीवन बीता जाये, भाई रे…
जीवन बीता जाये !
भरा नहीं आलस में मैंने,
ये घट रीता जाये !! भाई रे…

मन मकड़ी ने बुने जाल सब,
रस की चाहत, पर दे कपास कब,
फँसता गया, निकल ना पाया,
उलझन को सुलझन समझ कर,
मैंने दिन बिताये |
भाई रे… जीवन बीता जाये !

घड़ी की सूंई सी, आवक-जावक,
एक पल भी मैं, कभी ना ठहरा
सुन ना पाया, टिक-टिक उसकी,
बना रहा मैं देखो बहरा
रात-दिन अनवरत हमैशा,
शब्द-अश्व दौड़ाये |
भाई रे… जीवन बीता जाये !

      लगता है कुछ बाकी रह गया,
जो मैं अब तक कर ना पाया
सदियों से सुनते आये सब,
उसी गीत को मैंने गाया
अलग करूं पर,कर ना सका,
ये पीड़ा मुझे सताये |
भाई रे…जीवन बीता जाये,

भरा नहीं आलस में मैंने,
ये घट रीता जाये…भाई रे….
जीवन बीता जाये …
*******************

By:

Vishwambhar Vyagra

विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी, स.मा. (राज.) 322201
MOB :- 9549165579

Email: vishwambharvyagra@gmail.com

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