जीवन राग-जितेंद्र कुमार गुप्ता

जीवन राग-जितेंद्र कुमार गुप्ता

युगो-युगो पहले छिड़ी थी महाभारत
जिसका शंखनाद आज भी परिव्याप्त है।
महाभारत खत्म हुई नहीं,
आज भी घर- घर महाभारत हो रही।
कहते हैं न,
इतिहास खुल को दुहराता हैं
आदमी जानवर बन
आदमियत को मार
कभी- कभी जाग जाता हैं।
शंखनाद पुन: होगा
फिर धर्म- युद्ध होगा।
न्याय- अन्याय मध्य पुन:
जंग होगी।
फिर सगे- सगे को मारेंगे
घर- घरखून की होली होगी
धर्म को बचाने के लिए
फिर धर्म- युद्ध होगा।
धर्म का जब- जब क्षय हुआ
अधर्म का नाश
धर्म का विजय हुई।
इसी मध्य गीता का प्रादुर्भाव हुआ
ताकि फिर ऐसा महायुद्ध कभी न हो
खून की नदी न बहे
पुन: लाखों निर्दोषों की बलि न हो
ऐसा धर्म संदेश मिला।
पर “गीता” का उपदेश भूलाकर
हर बार मानवता हारी हैं
तभी! तो आज भी महाभारत जारी है
पृथ्वीका अस्तित्व तभी है
जब तक धरा पर नारी है।

 

Jitendra Kumar Guptaजितेंद्र कुमार गुप्ता

  अररिया, बिहार 

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