जिन्दगी का त्यौहार – रवि कान्त अगृवाल

जिन्दगी का त्यौहार – रवि कान्त अगृवाल

मां की ममता,पिता का प्यार
भाई की डांट,बहन का दुलार

यहीं तो है जिन्दगी का त्यौहार

बात बात पर बहन से लडना
बेमतलब के लफडो मे पडना
फिर खाई मम्मी की मार

यहीं तो है जिन्दगी का त्यौहार

हर बात पर रौब दिखाना
ना किसी चीज का ठिकाना
फंस जाने पर बन जाना मासूम और लाचार

यही तो हैं जिन्दगी का त्यौहार

होमवकृ ना समय पर करना
मार पिटी तो दे दिया धरना
फिर शुरू छोटों पर अत्याचार
यहीं तो है जिंदगी का त्यौहार

रवि कान्त अगृवाल

(पुणे)

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