जिन्दगी के नज़ारे – सोम्या चन्द्रम

जिन्दगी के नज़ारे – सोम्या चन्द्रम

तूफानों से जब घिरी थी मैं
मुझे एक तिनके का सहारा मिला

लाखों बंदिशों की बस्ती में
मुझे जीने का सहारा मिला

पीछे की और अनवरत जा रही थी मैं
अचानक मुझे आगे बढ़ने का इशारा मिला

हिम्मतें मेरी टूट चुकी थी
तभी मुझे जूनून से भरा पिटारा मिला

रातें घनी थी
तभी मुझे टूटता हुआ तारा मिला |
जब मैं उन टूटते हुए तारों के सहारे आगे गयी
फिर मुझे खुद का छत्रछाया मिला

खुद के छाये में परेशां बैठी थी मैं
तभी मुझे कुदरत का नजारा मिला |
जब मैं अपने मुकाम को ढूंढते हुए नज़ारे के तरफ गयी
फिर मुझे खुद पर भरोशा बनाए रखने का मौका दोबारा मिला |

सोम्या चन्द्रम
समेली (कटिहार)

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