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जीवन का सार-अजय-प्रताप सिंह-

आनंद की कर खोज ए नर,
ना भटक यू दर -बदर ।
सब रास्ते जब देख लेगा,
जाएगा फिर तू किधर ॥ आनन्द की कर ….
पल -पल यहां अनमोल है,
यह धरा तो गोल है ।
घूम फिर कर इस जहां में ,
आ जाएगी वही डगर ॥ आनन्द की कर …
गम और खुशी का साथ है,
यह जिंदगी सौगात है ।
सत्य को पहचान ले,
आनंद पर ही जा ठहर ॥ आनन्द की कर …..
दुष्कर्म दुख का सार है ,
व्यभिचार ही अंधकार है ।
त्याग को गले लगा,
सत्कर्म का आंचल पकड़ ॥ आनन्द की कर ….
हर पल खुशी होती नहीं,
मृत्यु चुप सोती नहीं ।
जिंदगी तो क्षीर्ण है,
चार दिन का है सफर ॥ आनन्द की कर …..

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