जीवन पथ :: जिंदगी का सफर – सौम्या

जीवन पथ :: जिंदगी का सफर – सौम्या

जिस जिससे जीवन पथ पर स्नेह मिला
हर उस राही को धन्यवाद।

जीवन अस्थिर अनजाने ही
हो जाता पथ पर मेल कहीं
सीमित पग-डग, लम्बी मंज़िल
तय कर लेना कुछ खेल नहीं

दाएँ-बाएँ सुख-दुख चलते
सम्मुख चलता पथ का प्रमाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
हर उस राही को धन्यवाद।

साँसों पर अवलम्बित काया
जब चलते-चलते चूर हुई
दो स्नेह-शब्द मिल गए, मिली
नव स्फूर्ति थकावट दूर हुई

पथ के पहचाने छूट गए
पर साथ-2 चल रही याद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
हर उस राही को धन्यवाद।

जो साथ न मेरा दे पाए
उनसे कब सूनी हुई डगर
मैं भी न चलूँ यदि तो भी क्या
राही मरते पर राह अमर

इस पथ पर वे ही चलते हैं
जो चलने का पा गए स्वाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
हर उस राही को धन्यवाद।

कैसे चल पाते यदि न मिला
होता हमको हे प्रभु तेरा आशीर्वाद
कैसे चल पाते यदि न मिलते
चिर-तृप्ति अमरता-पूर्ण प्रहर

मेरे चलने का मार्ग अलग
मेरी प्रगति का शीर्ष नया
मैं हूँ औरों से बहुत अलग
मेरा हो अपमान जहाँ
मैं वहाँ भी सुखी रह लेती हूँ
पर अपनेपन का हो खेल जहाँ
यह उपहास मुझे क्षति देता है,

मेरा अवलंम्बन,आलोकन नहीं
पाया है जग से मैंने कुछ त्याग प्रसाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
हर उस राही को धन्यवाद।

आभारी हैं हम उन सबके
दे गए व्यथा का जो प्रसाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
हर उस राही को धन्यवाद।


somyaसौम्या,
संत कबीर नगर, यूपी

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