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जो पढ़े लिखे है वो उत्पात मचाये है – अरूण आज़ाद

इस देश के बेटे है हम भारत माँ के गर्भ से आये ।
जो अनपढ़ है वो गुझिया सिवाइया बदल रहे
जो पढ़े लिखे है वो उत्पात मचाये है ।।

एक ही दीवार पे हम दोनो ने छत टिकाये है
बैठ चबूतरे पर पूरी रात बतियाये है
सुख दुख के हम साथी थे
मिज्जन के निकाह में हमी बराती थे
एक ही थाली के बिरयानी हमने संग ही खाये है ।
जो अनपढ़ है वो गुझिया सिवाइया बदल रहे
जो पढ़े लिखे है वो उत्पात मचाये है ।।

मुश्किल मे हम दो दुआ बदलते थे
अल्लाह राम से खुद जाके मिलते थे
भभूत पठाये जाते थे
जो माथे पे लगाये जाते थे
ऊपरवाला भी शायद खुश होकर कहता था
कि देखो अपने बच्चे आये है ।
जो अनपढ़ है वो गुझिया सिवाइया बदल रहे
जो पढ़े लिखे है वो उत्पात मचाये है ।

अब हम दोनो ही लिखते है पढ़ते है
अपनी अपनी कौम मे खूब बिकते है
हम दोनो की अपनी सेना है
केवल शब्दो का ही लेना देना है
जितना #social_media में सक्रिय है
एक दूजे के दिल में उतना ही निष्क्रिय है
मोहब्बत से गायब है नफ़रतो मे छाये है ।
जो अनपढ़ है वो गुझिया सिवाइया बदल रहे
जो पढ़े लिखे है वो उत्पात मचाये है ।।

Arun Azadअरूण आज़ाद
राजेन्द्र नगर रिसिया बहराइच (उतर प्रदेश )

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

4 thoughts on “जो पढ़े लिखे है वो उत्पात मचाये है – अरूण आज़ाद”

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