जो समय के साथ नहीं चलता- विनोद जैन

जो समय के साथ नहीं चलता- विनोद जैन

जमाना उसकी नहीं सुनता
जो समय के साथ नहीं चलता ।

वह डूबा रहता चिंताओ में
बीते के अफसोस की
भविष्य की सोच की
वह वर्तमान को नहीं देख पाता
जो समय के साथ नहीं चलता ।

आज मनुष्य चाँद पर पहुंच चुका है
पर वह अब तक किस्मत को देख रहा है
बाद में उसके हाथ कुछ भी नहीं आता
जो समय के साथ नहीं चलता ।

फिर अचानक जाग कर एक दिन
भागता समय के पीछे वह दीन
पर समय तो चल चुका कछुए की चाल
वह बन गया खरगोश बेहाल
जीवन की बाजी वह जीत नहीं पाता
जो समय के साथ नहीं चलता ।।

जमाना उसकी नहीं सुनता
जो समय के साथ नहीं चलता ।

 

   विनोद जैन

गांधीधाम, गुजरात

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