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कभी कभी तो सुख मिले

(7) कभी कभी तो सुख मिले, कभी कभी तोदुख होय। कभी कभी तो हंसे, कभी कभी तो रोय।। (8) बुराई ग्रहण करे सुख चहे, कैसे बो पा पाय। खाये कडबे फल को, मिठास कहां से आय।।(9) बो रहा तो क्या हुआ, जैसे पेड़ बबूल। उससे कभी न पायगा, आम के फल फूल।।(10) सोनू मुक्ति तेरी हो जायगी, करले सतगुरु की खोज। काहे को जा संसार में, अति कसटा सहे रोज ।।(11) सोनू आपणे खेत में, पाप के बीज न बोय। इन बीजौ के खेत में, अंकुर न फूटै कोय।। (12) आत्मा परमात्मा रूप हे , तु मत समझै इन्सान। जो समझै तो समझ ले, नाराज हो भगवान।।(13) दुर्बल की सहाय कर, भूखे को दे भीख। मात पिता की सेबा कर, यही काम हे ठीख।।(14) नर नही अबतार हे, दुर्बल की करै सहाय। अपनी भूख को छोड़कर, भूखे की भूख मिटाय।। (15) ईश ऐसे मन मे बास है, जैसे नीर के घट में सूर। घट में अति समीप लखे ,फिर भी अति दूर।।(16)चाहे आम का पेड़ बो, चाहे पेड़ बबूल। सब कुछ तेरे हाथ में, कैसे चाही फल फूल।।(17) दे रहा तो ठीक है, मन से दे सब कोय। मन से अगर जो न दिया, देने से कछू न फायदा होय।। (18) कर रहा तो क्या हुआ, कितने भी करले पुण्य। मन से अगर जो न किये , फिर भी रहेगा सु़ंय।।(19) उसकी हत्या कबहु न कीजिये, कोई कैसा होय। हत्या तो हत्या होत है, पाप लगेगा तोय।।(20) अच्छे का सब कोई है, बुरे का न कोई होय। कहे सोनू बहिकाबे में आयके, गलती करे न कोय।।(21) बिधया मिलही सुजान सों , जड़ मतों से न कोय। रोशनी मयंक से होत है, सितारों से न होय।।(22) सोनू हलुआ पूड़ी खाइये, और खाइये खीर। मांस कबंहु न खाइये, मिटे भले ही पीर।।(23) कैसे उसको मोक्ष मिले, कैसे मिले भगवान। मोह माया के जाल में, फंसा हुआ इन्सान।।(24) मन से भक्ति जिसने करी, ईश्वर की इन्सान। ईश्वर ने उसको किया , खुशियों से धन धान।।(25) कैसे किसी का भला करे, कैसे करे प्यार। दोलत ने इन्सान को, बना दिया बेकार।।(26) पुत्र मात पिता का लाड़ला, होता उनकी जान। उसको बचाने के लिये , खुद के भी दे दै प्रान।।(27) कौन उसकी पीड़ा हरे, कौन सुने पुकार। जब उससे स्वयं अगर, रूठ गया करतार ।।(28) पाल पोषके बड़ा किया, करि दिया जबान। जब आई बारी बेटा की, हो गया अंजान।।(29) कोई रोजा पूजा करे, या भजन दिन रात। मिले सुख जिसने दिया , मात पिता का सात।।(30) कितनी सच्ची दोस्ती, कितना सच्चा प्यार। वक्त आने पर सभी, जान जात है यार।।(31) कैसे बे प्रेमी है, कैसा उनका प्यार। प्यार को पाने के लिये ,भूल जात संसार।।(32) भाई तो बो होत है , भाई का साथ निभाय। उसकी जान के पीछे, अपनी जान गमाय।।(33) प्रेमिका प्रेमी के बिना,जी कभी न पाय। ज्यों मछली जल के बिना, तड़प तड़प कर मर जाय।।(34) जैसा सुख में भला किया, बैसा दुख में कर। पत्ता मुरझाये चाहे खिले, छाया देत मगर ।।(35) जो सुख में सिमरन करै, ईश्वर उसके साथ।उसकी मर्जी के बिना, दुख की क्या औकाथ।।(36) ओ मेरे भगवान जी, इतना देना ज्ञान। सारी उमर करता रहूं,गुरू मात पिता का सम्मान।।(37) बच्चा होता जगत में, बिलकुल भी अंजान। जिसने जैसा कह दिया, बैसा ही लेता मान।।(38) बच्चा होता जगत में , बिलकुल भी अंजान। जिसने जैसी सीख दी , बैसा ही बने इन्सान।।(39) किसी का कहना माने नहीं , काम करे बेकार। उससे जादां होत है, छोटा बच्चा होसियार।।(40) मन्दिर मसजिद पूज रहे, जग में सब लोग। फिर भी सुख नशीब नहींं, दुख रहे हैं भोग।।(41) कितना सच्चा दोस्त हो, कितना भी हो सगा । देता जरूर एक दिन, उसको कभी दगा।।(42) ओ मेरे भगवान जी ,ऐसा दो बरदान। सारी उमर बना रहे ,गुरू मात पिता पर ध्यान।।(43) कुछ करले ने दो संसार में, कृपा इतनी करो भगवान। फिर चाहे उसके बाद में , ले लो हाल ई प्रान।।(44) सुख दुख हो सब झेलिये, मत हो परेसान। यह नशीब का लेख है , न बदले इन्सान।।(45) मात पिता की सेबा करे, परहित देबै जान । साक्षात अबतार है, आम नहीं इन्सान।।(46) हरि की कृपा बनाय रखि, रोज किया करि याद। जो उसकी कृपा हटी , हो जायेगा बर्बाद।।(47) अब कैसे आतंक समाप्त हो , बिकने लगी सरकार। रिस्पत लेकर छोड़ दे, डाकूं और गद्दार।।(48) हरि नाम का जाप करि, करके मनसा साफ। अब तक जितने पाप किये, करि देगा सब मांफ।।(49) उसको कस्ट न दीजिये, जो तुझको दे इन्सान। धरती सदां धीरज रखे, जोततु रहे किसान।।(50) सोनू कुसंग न बनिये, बिपत्ति सैं बचे न अंग। अभी नहीं तो कभी तो, लोहे को खाये जंग

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